10 Moral Stories In Hindi For Class 5 :- शिक्षाप्रद कहानियां।


Hindi Moral Stories For Class 5th:- Here I am sharing 8 short moral stories of education in Hindi for children ,which is very valuable and gives your children good education in life, which helps your children to understand the world, that's why I am sharing with you.
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1. मेहनत बड़ी या अक्ल (Hindi Stories for class 5)

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Moral Stories In Hindi For Class 5 

सुमित और अभिनव नाम के दो लड़के थे। दोनों की दोस्ती बड़ी ही पक्की थी।

पढ़ाई खत्म होने के बाद दोनों की एक ही जगह नौकरी भी लग गई।

नौकरी लगने के बाद दोनों एक दूसरे से कैंटीन में बात करते हैं।

सालों की मेहनत के बाद आखिर हमें नौकरी मिल ही गई।
यहां भी जमकर मेहनत करेंगे और कुछ ही सालों में हमें प्रमोशन मिल जाएगा।

ऐसी बात कर कर दोनों हंसने लगे और दोनों खाना खाने के बाद दोनों अपने अपने काम पर लग जाते हैं।

काम करते करते हैं उन्हें अब 1 साल बीत चुका है।
प्रमोशन का भी समय आ चुका है जिसका दोनों बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

सुमित और अभिनव दोनों एक दूसरे से कहते हैं कि लगता है मुझे ही प्रमोशन मिलेगा तुम अगले साल की तैयारी कर लो।
इतने में दोनों के बॉस वहां आ जाते हैं प्रमोशन में वह सिर्फ अभिनव का नाम लेकर वहां से चले जाते हैं।

प्रमोशन में अपना नाम ना सुनकर सुमित को झटका लगता है।

और वह नाराज हो जाता है।
तभी अभिनव उससे बोलता है की कोई बात नहीं सुमित ऐसा हो जाता है।

तूने भी मेहनत की है शायद कुछ हमारे बॉस को पसंद नहीं आया होगा।

पर तू देखना अगली बार तुम्हें जरूर प्रमोशन मिलेगा।
बिना कुछ कहे सुमित वहां से चला जाता है।

और एक जगह बैठ कर सोचने लगता है मैंने भी साल भर मेहनत की पर सिर्फ अभिनव को ही प्रमोशन क्यों मिला।
मुझे क्यों नहीं मैं आज ही या नौकरी छोड़ दूंगा।

अमित तुरंत बॉस के पास जाता है और नौकरी छोड़ने की बात कहता है।

बॉस ने कहा लेकिन क्यों अचानक तुम्हें क्या हुआ
अमित बोला मैं भी पिछले 1 साल से मेहनत कर रहा हूं मैं और अभिनव एक साथ यहां नौकरी करने आए थे।

पर प्रमोशन सिर्फ उसे यह तो बिल्कुल गलत है सर
अमित गुस्से में ऐसी बातें भी बोल जाता है जो उसे नहीं बोलनी चाहिए।

बॉस उसकी बात सुनकर बोले ।
देखो सुमित मुझे पता है कि तुमने बहुत मेहनत की है। पर उतनी नहीं जितनी तुम्हें करनी चाहिए थी।
अमित नहीं मानता है

तब उसके बॉस फिर कहते हैं कि मैं तुम्हें प्रमोशन और अभिनव से अच्छी सैलरी भी दूंगा।

पर तुम्हें इसके लिए एक काम करना होगा।
सुमित बोला ठीक है मैं करूंगा।

बॉस ने कहा बाजार जा कर पता करो आम कौन कौन बेच रहा है।

थोड़ी देर बाद अमित बाजार से वापस आता है और बॉस से कहता है।

बाजार में सिर्फ एक ही आदमी आम बेच रहा था।
बॉस बोले ठीक है अब जाकर पता करो की आम कैसे किलो मिल रहे हैं।

यह सुनकर सुमित दोबारा बाजार जाता है और आम के भाव पता करके वापस आता है।

और कहता है बाजार में आम ₹50 किलो मिल रहा है
बॉस ने कहा ठीक है।

मैं अब यही काम अभिनव को दूंगा बॉस अभिनय को यह काम लेते हैं।

तो अभिनव बाजार जाता है और सब कुछ पता करके वापस आता है।

और बॉस से कहता है सर बाजार में एक ही आदमी है जो ₹50 किलो के हिसाब से बेच रहा है।

अगर हम उससे सारे आम ले लें तो वह हमें ₹40 प्रति किलो के हिसाब से दे देगा।

उसके पास 60 किलो आम है।
अभिनव की बात सुनकर सुमित बहुत हैरान होता है। और उसे अपनी गलती का एहसास हो जाता है।

उसे यह पता चल जाता है की सिर्फ मेहनत करने से काम नहीं होता हमें अपनी अकल का भी इस्तेमाल करना चाहिए।

सुमित नौकरी छोड़ने वाली बात अपने दिल से बाहर निकाल देता है।
और वही  काम करने का फैसला कर लेता है।

शिक्षा........
1. हमें काम करते समय अपनी बुद्धि का भी इस्तेमाल करना चाहिए।
2. जब बुद्धि और मेहनत साथ मिलते हैं तो काम अच्छा होता है।

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2. मेहनत का फल (moral stories in hindi for class 5)

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दो दोस्त थे संजय और मनोज दोनों बेरोजगार थे।
दोनों अपने परिचित गुरुजी से अपनी परेशानी बताई।

और कहा गुरु जी हमें कुछ रुपए दीजिए जिससे हम कुछ काम धंधा शुरू कर सकें।

गुरुजी ने दोनों को एक एक हजार रुपए दिए और कहा तुम्हें यह रुपए 1 साल के अंदर लौटाने होंगे।

दोनों ने गुरुजी की बात मान ली और रुपए लेकर चल दिए।
रास्ते में संजय ने कहा हमें इन रुपए से कोई अच्छा काम शुरू करना चाहिए।

पर मनोज ने कहा नहीं अब कुछ दिन हम इन रुपयों से अच्छे स्थान पर घूमने जाएंगे।मौज करेंगे।

1 साल बीत जाने के बाद दोनों दोस्त गुरुजी के पास आए।
गुरुजी ने पहले मनोज से पूछा तुमने उन रुपयों का क्या किया। क्या लौटाने के लिए रकम लाए हो।

मनोज ने मुंह लटका कर कहा गुरुजी किसी ने वह रुपए ठग कर ले लिए।

फिर गुरु जी ने संजय से पूछा तुम भी खाली हाथ आए हो क्या।

संजय ने मुस्कुराकर जवाब दिया नहीं गुरु जी यह लीजिए ₹1000 और अतिरिक्त ₹1000
गुरुजी ने पूछा तुम इतने रुपए कहां से कमा लाए। क्या तुमने किसी को धोखा दिया है।

संजय ने बताया जी नहीं मैंने तो यह अपनी सूझबूझ से रुपए कमाए हैं।

एक किसान कों  परेशानी में देखकर मैंने उसके सभी फल खरीद लिए।

फिर उन्हें शहर में जाकर बेच दिया इसके बाद वह प्रतिदिन हमें फल ला कर देता। और मैं उन्हें बेच देता ।

कुछ दिनों के बाद मैंने शहर में दुकान लेली और फलों का काम शुरू किया।

इतना कह कर वह गुरु जी को मदद करने के लिए धन्यवाद दिया ।
और अतिरिक्त रुपए किसी जरूरतमंद को देने के लिए रखने का आग्रह किया।

गुरुजी संजय से बहुत खुश हुए और मनोज से कहा अगर तुम भी समझदारी और मेहनत से काम करते तो सफल हो सकते थे।

संजय ने कहा अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है समय का सम्मान करो और श्रम का महत्व समझो।
सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी।

शिक्षा.........
1. समय का सम्मान करो।
2. श्रम का महत्व समझो सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी।

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3. मूर्ख ब्राम्हण (moral stories in hindi for class 5)


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एक गांव में एक ब्राह्मण रहता था वह दुर्गा माता का भक्त था।
एक दिन वह अपने गुरु की आज्ञा से दुर्गा माता की तपस्या करने के लिए चला गया।

वह ब्राम्हण तपस्या में लीन हो गया काफी हवाएं चलेंगी बारिश हुई धूप हुई पर ब्राह्मण की तपस्या भंग नहीं हुई।
दुर्गा माता उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर उसे दर्शन देकर कहां।

मैं तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हूं मांगू क्या वरदान मांगते हो।
ब्राम्हण बोला माता आप के दर्शन हो गए इतना ही काफी है।

माता बोली फिर भी मैं तुम्हें एक वरदान देना चाहती हूं तुम्हें जो मांगना है मांग लो।

ब्राह्मण काफी सोचने के बाद माता से संजीवनी बूटी मांगी ।
माता उसे संजीवनी बूटी देते समय उसे बताया कि किसी भी मृत्यु आदमी या किसी मृत्यु जानवर पर संजीवनी बूटी का रस छिड़क दोगे।

तो वह जिंदा हो जाएगा ब्राह्मण संजीवनी लेकर अपने गांव की तरफ चल दिया।

रास्ते में वह सोच रहा था कि मैं इस संजीवनी से मृत्यु पर विजय पा लूंगा।

हमारे गांव में कोई दुखी नहीं होगा सब मुझसे खुश होकर हो सकता है मुझे सरपंच भी बना दे।

ब्राह्मण कुछ आगे बढ़ता है तभी उसके मन में ख्याल आता है।
कहीं यह संजीवनी नकली तो नहीं ब्राह्मणों से प्रयोग करके देखना चाहता है।

तभी कुछ दूर पर उसे एक मरा शेर दिखाई देता है ब्राह्मण सोचता है चलो इसी पर देखते हैं।

ब्राह्मण शेर के ऊपर संजीवनी का रस छिड़कता है। तो शेर जिंदा हो जाता है।

शेर में अब पहले जैसी ताकत आ जाती है शेर पहले भूख से मरा था।

तो उसे भूख लगी थीशेर ब्राम्हण को देखकर जोर से दहाड़ता है।

ब्राम्हण सोचता है यह मुझसे क्या हो गया मैंने तो शेर को जिंदा कर दिया।

अब यह हमें जिंदा नहीं छोड़ेगा। ऐसा सोचकर ब्राम्हण भागने लगा।

शेर उसे खाने के लिए दौड़ा ब्राम्हण ज्यादा भाग नहीं पाया और शेर उसे मार कर खा गया।

शिक्षा..........
1. कोई भी काम करने से पहले उसके परिणाम के बारे में सोचना जरूरी है।
2. हमें कोई भी काम सोच समझ कर करना चाहिए

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4. चार मित्र और शेर (moral stories in hindi for class 5)

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एक बार  एक गांव में चार ब्राह्मण रहते थे।
तीन तो पढ़ने लिखने में व्यस्त रहते थे।

और चौथा जिसका नाम बिरजू था उसे पढ़ने लिखने का कोई शौक नहीं था।

1 दिन वे तीनों इकट्ठे हुए उनमें से एक बोला क्यों ना हम शहर जाकर अपनी किस्मत चमकाए ।

थोड़ा बहुत जो किताबों से ज्ञान लिया है तो उसका लाभ हमें यहां नहीं मिल सकता।

दूसरे ने बोला ठीक है पर हम अपने मित्र बिरजू को साथ नहीं ले जाएंगे।

वह तो गवार है हम पर बोझ ही होगा।
तीसरा बोला हां ठीक है उसे कुछ आता जाता तो नहीं पर वह हमारा बचपन का मित्र है इसलिए उसे छोड़ भी तो नहीं सकते

जो भी हो उसे ले चलते हैं वहां पर जो हम कमाएंगे उनमें से कुछ उसे भी दे दिया करेंगे।

इस तरह वे चारों शहर की ओर चल दिए। पर रास्ता एक जंगल से होकर गुजरता था।

जब वह जंगल के अंदर कुछ दूर तक चले गए तो अचानक में एक हड्डियों का ढांचा दिखाई दिया ।

एक ने कहा यह हड्डियां बब्बर शेर की लगती हैं दूसरा बोला क्यों ना हम अपनी ज्ञान की परीक्षा यही ले लेते हैं।

मैं हड्डियों को इकट्ठा करके कंकाल का रूप दे सकता हूं।
अगला अगर तुम कंकाल खड़ा कर सकते हो तो मैं उन में त्वचा और मांस पेशियां भर सकता हूं।

तीसरा बोला अगर तुम लोगों ने अपना काम सही से कर दिया तो उसमें दाना डालने का जिम्मा मेरा।

चौथा सोचने लगा कहीं यह सब पागल तो नहीं हो गए अगर सचमुच यह हड्डियां शेर की हुई तो अनर्थ हो जाएगा

पहले ने हड्डियों को जोड़कर कंकाल बना दिया।
दूसरे ने अपने विद्या से उसमें मांसपेशियां व त्वचा भर दी।
तीसरे ने बिरजू से कहा बिरजू क्या तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हें भी पढ़ना चाहिए था।

बिरजू ने कहा यह सब तो ठीक है पर गलती से इसमें प्राण मत डाल देना। वरना हम सब मारे जाएंगे।

तीसरा बोला तू इतना एहसान फरामोश होगा जानते हो तुम्हें अपने साथ लेकर चलने के लिए मैंने इन्हें बनाया था।
बिरजू बोला लेकिन

तीसरा बोलो लेकिन लेकिन कुछ नहीं जब मेरी बारी आई ज्ञान दिखाने की तो तु मुझे रोक रहा है।

बिरजू बोला तो ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी पर मुझे पहले पेड़ पर चढ़ लेने दो।

तीसरा बोला जा डरपोक जा बिरजू लपक कर पेड़ पर चढ़ गया।

तीनों ब्राह्मण के ज्ञान से जैसे ही शेर में जान आई शेर उन तीनों ब्राह्मणों को मारकर खा गया।

शिक्षा........
1. कुछ भी करने से पहले सोचो
2. कोरा ज्ञान व्यर्थ है

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5. जादुई मुंह (moral stories in hindi for class 5)

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एक बार की बात है एक गांव में एक औरत अपने दो बेटियों के साथ रहती थी।

उसके पति का देहांत हो गया था तो वह अपने बेटियों के साथ ही रहती थी।

उस औरत की बड़ी बेटी बहुत क्रूर और घमंडी स्वभाव की थी।
औरत भी क्रूर स्वभाव की थी।

पर उसकी छोटी बेटी बहुत ही मधुर स्वभाव की थी।
इसलिए वह औरत अपनी छोटी बेटी से नफरत करती थी
और अपनी बड़ी बेटी से जो उसके स्वभाव की थी उससे प्यार करती थी ।

बड़ी बेटी के घमंड के कारण उसे गांव वाले नहीं पसंद करते थे।

वहीं छोटी बेटी के मधुर स्वभाव के कारण छोटी बेटी को गांव वाले बहुत मानते थे।

इससे उसकी मां बहुत जलती थी इसलिए वह छोटी बेटी को घर के कामों में उलझा कर रखती थी।

और बड़ी बेटी को अपने साथ आराम करने को कहते और उसे सजाने संवारने मैं व्यस्त रहते।

पर छोटी बेटी इस बात से अपनी मां को कुछ नहीं करती थी और अपने कामों को बड़े लगन से करती थी।

एक दिन जब छोटी लड़की पानी लेने कुए पे गई तो वहां उसे एक बूढ़ी औरत मिली।

बूढ़ी औरत ने कहा मुझे बहुत तेज से प्यास लगी है क्या तुम मुझे पानी पिला सकती हो।
छोटी लड़की दयालु थी इसलिए उसने बूढ़ी औरत को पानी पिलाया।

तब बूढ़ी औरत एक परी के रूप में बदल गई और बोलि तुम वाकई में बहुत सुंदर हो और तुम्हारा मन भी बहुत सुंदर है।
मैं तुमसे बहुत खुश हूं मैं तुम्हें वरदान देना चाहती हूं बताओ तुम्हें क्या वरदान चाहिए।

छोटी बेटी ने कहा जी नहीं मुझे कोई वरदान नहीं चाहिए।
तब परी ने उसे अपनी तरफ से एक वरदान दिया कहा मैं तुम्हें वरदान देती हूं की जब तुम बोलोगी तो तुम्हारे मुंह से मोती गिरेंगे।

और जब तुम हंसोगे तो तुम्हारे मुंह से गिरे गिरेंगे यह बोलकर परी गायब हो गई।

यह छोटी बेटी घर गई तब उसकी मां ने उसे डांटना शुरू किया।

जबछोटी बेटी सारी घटना बताने लगी तब उसके मुंह से मोती गिरने लगे।

और जब वह हंसी तो उसके मुंह से हीरो गिरने लगे।
यह सब देख कर उसकी मां सोचने लगी कि काश इसकी जगह मेरी बड़ी बेटी पानी लेने गई होती।

फिर अगले दिन अपनी बड़ी बेटी को सजा धजा के पानी लेने कुए पर भेजें।

और उसे बताया कि जब भी तुम्हें कोई बूढ़ी औरत पानी मांगे तो उसे बड़े प्यार से पानी पिलाना।

बड़ी बेटी कुए पर उस बूढ़ी औरत का इंतजार कर रही थी।
तभी वहां एक भिखारी आया और बोला मुझे बहुत प्यास लगी है।

क्या तुम मुझे पानी पिलाओगे।
बड़ी बेटी ने कहा क्या मैं तुम्हें यहां पानी पिलाने के लिए बैठी हूं।चल भाग यहां से

तभी वह भिखारी आदमी परी में बदल गया और बोला तुम बहुत घमंडी लड़की हो इसलिए मैं तुम्हें वरदान देता हूं।
के जब भी तुम बोलोगी तो तुम्हारे मुंह से छिपकली मेंढक निकलेंगे।

जब बड़ी बेटी घर गई तो उसकी मां ने पूछा क्या हुआ बड़ी बेटी सभी घटना बताने लगी।

तो वहां पर बहुत सारे छिपकली और मेंढक जमा हो गए।
इस पर उसकी मां नेउसका मुंह बंद बांध दिया यह सोच कर कि इसका कारण छोटी बेटी है।

 दोनों छोटी बेटी को मारने चल दिए। छोटी बेटी अपनी जान बचाकर जंगल में भागने लगी।

जंगल में कुछ आगे गई तो उसे राजा और उनका लड़का मिला।

जब राजा ने पूछा कि अकेली जंगल में क्या कर रही हो
तब छोटी लड़की ने जैसे ही सब बताया वैसे ही उसके मुंह से मोती गिरने लगा ।

राजा या देखकर बहुत खुश हुआ और अपने बेटे के साथ उसकी शादी कर दिया।

और छोटी बेटी महारानी बन कर अपना जीवन व्यतीत करने लगी।

इधर उसकी मां और बड़ी बहन को गांव वालों ने गांव से बाहर निकाल दिया।

शिक्षा........
1. घमंड नहीं करना चाहिए
2. दूसरों से आदर पूर्वक बात करनी चाहिए

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              Disclaimer 

India gayan - ऊपर दी गई कहानी का सत्यता से कोई तात्पर्य नहीं है यह सिर्फ बच्चों के लिए मनोरंजन और ज्ञान के लिए बनाया गया है यह किसी सत्य घटना से कोई संबंध नहीं रखता है




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