200+ Hindi short stories with moral for kids.। नैतिक कहानियाँ हिंदी में

 Today we are writing Hindi short stories with moral and education for children. These stories are for children and have written the words of knowledge in it. These short stories will be useful for children as well as everyone.


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             नैतिक कहानियाँ हिंदी में

नीचे लिखी 200 लघु हिंदी कहानियां हैं। हमें विश्वास है कि नीचे दी गई बेहद दिलचस्प कहानियां पसंद आएंगे।


1. सोने का अंडा (short stories in hindi) 

एक दिन एक किसान के हाथ ऐसी मुर्गी लगी जो रोज एक सोने का अंडा देती थी। वह उसे बेचकर रोजधन इकट्ठा करता था। और नई नई वस्तुएं अपने परिवार के लिए लेकर आता था। धीरे-धीरे वह गांव में सबसे अमीर हो गया नया घर बहुत सारे घोड़े बहुत सारा खेत का वह मालिक हो गया था। 

एक बार उसने सोचा मुर्गी रोज एक ही अंडा देती है। ना जाने इसके पेट में कितने अंडे हैं। ऐसा करता हूं कि मैं मुर्गी का पेट फाड़कर सारे अंडे एक साथ निकाल लेता हूं। तो फिर मिलना क्या था जो एक अंडा रोज मिलता था उससे भी हाथ धो बैठे हैं।

शिक्षा - लालच बुरी बला है। हमें लालच नहीं करना चाहिए।

Moral of this short hindi story - 

Greed is bad. We should not be tempted.


2. लालची कुत्ता (short stories in hindi for kids)

छोटा सा कुत्ता था वह बहुत भूख से व्याकुल था। घूमते घूमते हैं उसे एक हड्डी मिली। जिसे देखकर बहुत खुश हुआ और लेकर चल दिया।रास्ते में आते हुए उसे एक तालाब मिला जिसमें उसकी परछाई दिखाई दे रही थी। पर उसे यह बात नहीं समझ में आई।

उसे लगा कि एक हड्डी और नीचे है। उसको उठाने के चक्कर में अपना मुंह खोला और उसके मुंह के हड्डी पानी में गिर गई। यह देखकर वह बहुत दुखी हुआ। इसीलिए कहते हैं लालच बुरी बला है।

शिक्षा - हमें लालच नहीं करना चाहिए।

Moral of this short hindi story - We should not be tempted.


3. फूटा घड़ा (hindi short stories)

एक गांव में श्याम नाम का किसान रहता था उसका छोटा सा खेत था।उसके पास दो मिट्टी के घड़े थे। जिससे वहां रोज अपने घर के लिए पानी लाता था। लेकिन उनमें से एक घड़ा फूट चुका था। जिससे नदी से पानी लाने पर एक घड़ा भरा रहता था और दूसरा घड़ा आधा खाली हो जाता था।

फूटा घड़ा बहुत ही शर्मिंदा रहता था। कि वह आधा पानी ही घर पहुंचा पता है। सही घड़े को इस बात का बहुत घमंड था। कि वह पूरा का पूरा पानी घर पहुंचाता है। सही खड़ा फूटे घड़े से कहता है तुम मालिक की मेहनत बर्बाद करते हो।

यह सुनकर फुटा घड़ा बहुत दुखी होता है। इस तरह दोनों घड़े की बातें सुनकर श्याम कहता है। कि तुम सिर्फ अपनी बुराई देख रहे हो पर मैं उस बुराई के साथ-साथ तुम्हारी अच्छाई भी देख रहा हूं। इसीलिए मुझे तुम्हारे अंदर कोई कमी दिखाई नहीं दी और तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि तुम हमारे किसी काम के नहीं हो। जाने अनजाने में तुमने हमारी बहुत मदद की है।

घड़ा बोला वह कैसे श्याम कहता है नदी से जब हर रोज घर वापस आते हैं। तो तुम्हारा पानी वहां लगे फुल पर गिरता है जिससे उन्हें फूलने में काफी मदद मिलती है।घड़ा बोला इन सब में आपकी मदद कैसे हुई। श्याम बोला मैं खेती के साथ-साथ उन फूलों को भी बाजार में बेचता हूं जिससे हमें धन मिलता है। और यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है इसलिए तुम अपने आप को कभी कम मत समझना।

शिक्षा -  हमें किसी के हुनर का कभी मजाक नहीं बनाना चाहिए। बल्कि उसकी अच्छाई को ढूंढ कर उसे निखारने में मदद करनी चाहिए।

Moral of this short hindi story - We should never make fun of someone's skills. Rather, finding his goodness should help him grow.


4. मां की सीख (short story in hindi)

चेतन अपनी मां के साथ बहुत अच्छे घर में रहता था। वह बहुत अच्छा लड़का था वह अपनी मां की बात मानता था। चेतन की मां बहुत अच्छे पकवान बनाती थी। चेतन को पकवान खाना बहुत पसंद था। एक दिन चेतन की मां ने बहुत बढ़िया पकवान बनाकर 1 बड़े जार में रख दिया।

और फिर बाजार चली गई बाजार जाने से पहले चेतन की मां चेतन से बोल कर गई थी। कि वह अपना गृह कार्य समाप्त करने के बाद वह यह पकवान खा सकता है। चेतन बहुत खुश हुआ वह जल्दी से अपना गृह कार्य समाप्त करके अपनी मां के लौटने से पहले ही पकवान खाना चाहा। वह जार के अंदर हाथ डाल कर ढेर सारे पकवान निकालना चाहा।

पर जार का मुंह छोटा होने के कारण वह अपना हाथ बाहर नहीं निकल सका। उसी समय उसकी मां बाजार से लौट आई। चेतन की मां ने जब चेतन को देखा तो बहुत हंसी और चेतन से बोला तुम एक या दो पकवान पकड़ कर हाथ बाहर निकालो। 

मां की बात मान कर वह दो पकवान पकड़ कर हाथ को बाहर निकाला तो वह आसानी से निकाल पाया। तब उसकी मां ने समझाया कि ज्यादा लालच नहीं करना चाहिए।जितनी जरूरत हो उतनी ही चीजें लेनी चाहिए।

शिक्षा - हमें लालच नहीं करना चाहिए आवश्यकता से अधिक लेने के लिए जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए।

Moral of this short hindi story - We should not be tempted to force ourselves to take more than necessary.


5. चींटी और कबूतर (hindi short story)

एक समय की बात है एक चींटी पेड़ पर से तालाब में गिर गई। एक कबूतर ने उसे अपना जीवन बचाने के लिए जी तोड़ मेहनत करके देखा। कबूतर तुरंत एक पत्ता तोड़ा और चींटी के पास फेंक दिया।चींटी झट से पट्टे पर चढ़ गई और तोते को धन्यवाद किया।

कुछ सप्ताह बाद बहेलियां जंगल में आया बहेलियां का काम होता ही है पक्षियों को पकड़ना। उसने कुछ दाने जमीन पर फेंके और अपना जाल बिछा दिया। वह चुपचाप किसी पक्षी को फसने का इंतजार कर रहा था। वही चींटी वहीं कहीं से गुजर रही थी तो उसने यह तैयारी देखी। फिर देखती है कि वही कबूतर जो उसकी जान बचाया था।

उसी जाल में फंसने के लिए धीरे-धीरे नीचे उतर रहा है। चिट्ठी जल्दी-जल्दी आगे बढ़ बहेलिए के पैर पर जोर से काट दिया। जिससे बहेलिया के मुंह से चीख निकल गई। और कबूतर उसकी आवाज सुनकर सब कुछ समझ गया। और कबूतर दूसरी ओर उड़ गया जिससे उसकी जान बच गई। और चिटी अपने काम पर चल दी। तभी तो कहते हैं कर भला तो हो भला।

शिक्षा - अगर आप किसी का भला करेंगे तो आपका भी भला होगा।

Moral of this short hindi story - If you will do good to someone then it will be well for you.


6. धोखेबाज भेड़िया और सारस (short stories in hindi with moral values)

एक भेड़िया ने भैंसे का शिकार किया और वह उसकी मास को खा रहा था। तभी अचानक उसके गले में एक हड्डी फंस गई। बहुत दर्द से छटपटाने लगा। गले में इतना दर्द था कि उसे लगा कि अब उसका अंत आ गया है। तभी उसे एक सारस दिखाई दिया। उसने कहा सरस भैया मेरे गर्दन में हड्डी फंस गई है।

कृपया मेरी मदद करो मैं आपका एहसानमंद रहूंगा। और इनाम भी दूंगा। सरस ने अपनी लंबी गर्दन उसके मुंह में डाली और अपनी सोच की मदद से हड्डी को बाहर निकाल दिया। तब जाकर भेड़िए के जान में जान आई। तब सारस बोला भेड़िए भाई मेरा इनाम दो यह सुनकर भेड़िया बोला इनाम कैसा इनाम।

शुक्र मना तेरा मुंह जब मेरे मुंह के अंदर था तब मैंने तुम्हें दबोचा नहीं जरा सोचो अगर मैं झगड़ा बंद कर लेता तो तुम्हारा क्या होता। इसलिए कहते हैं नेकी उन्हीं के साथ करनी चाहिए जो उनके लायक हो।

शिक्षा - नेकी उनके साथ करनी चाहिए जो उसके लायक हो।

Moral of this short hindi story - Righteousness should be done with them that deserve it.


7. भेड़िया और बकरी (short stories in hindi with moral)


एक बार एक भेड़िए ने एक बकरी को पहाड़ के ऊपर फिसलन भरी जगह पर घास खाते देखा और बोला बहन बकरी क्या तुम्हें फिसलन से डर नहीं लगता। बकरी ने जवाब नहीं दिया वह अपने काम में लगी रही। वह फिर बोला वहां पर बहुत ठंड है और नीचे बचाओ की जगह भी नहीं है।

बकरी फिर भी कुछ नहीं बोली और वहीं पर घास खाती रही। आखरी में भेड़िया जोर से फिर बोला बहन वहां से ज्यादा मीठी घास यहां पर है। बकरी बोली भाई तुम्हें मेरे भोजन की फिक्र है या अपनी हमें इससे यह शिक्षा मिलती है। कि दूसरे के बहकावे में नहीं आना चाहिए।

शिक्षा - हमें दूसरे के बहकावे में नहीं आना चाहिए।

Moral of this short hindi story - We should not be misled by others.


8. अंगूर खट्टे हैं (Hindi short stories for kids)

एक लोमड़ी भूखी प्यासी इधर उधर भटक रही थी। अचानक उसकी नजर अंगूर के ऊपर पड़ी और उसने छलांग लगाई पर वह अंगूर तक नहीं पहुंच सकी। उसने बार-बार प्रयास किया पर अंगूर उसके पहुंच से बहुत दूर थे। 

आखिर थक हार कर बोली मैं क्या करूंगी इन अंगूरों का यह तो खट्टे हैं। सच है जो काम नहीं कर पाते कुछ ना कुछ बहाना ढूंढ लेते हैं।

शिक्षा - अपनी नाकामी पर दूसरे को दोष नहीं देना चाहिए।


9. शेर और गधा (moral of the story in hindi)

एक शेर और गधे में दोस्ती हो गई दोनों एक साथ ही दर उधर घूमते थे। जहां भी वह जाते जानवरों में भगदड़ सी मच जाती थी। होता तो यह शेर के कारण था। और अपने गधे महाराज को लगता था कि उनसे सभी जानवर डरने लगे हैं।

वह अपने आपको बाकी जानवरों से ज्यादा ताकतवर समझने लगा।एक दिन दोनों घूम रहे थे तो उन्हें एक भेड़िए का झुंड नजर आया।गधा उन्हें देखकर चलाने लगा और सभी जानवर अपनी अपनी जान बचाने के लिए भाग पड़े लेकिन वह गधे से डरकर नहीं बल्कि शेर के डर से भाग रहे थे।

शेर बोला आज क्या हुआ बड़े जोर से चिल्ला रहे थे। गधा बोला तुमने ध्यान नहीं दिया मुझे देखकर  भेड़िए में कैसी भगदड़ मच गई थी। शेर को हंसी आ गई और उसने कहा अच्छा तो तुम इस कारण खुश हो रहे हो।

तुम हमारे मित्र हो यह सब जानते हैं और मैं तुम्हारे साथ था यह भी एक कारण है। ध्यान रखना ऐसी बेवकूफी तब ना कर बैठना जब मैं तुम्हारे साथ ना हो नहीं तो यह भेड़िए तुम्हें मारकर खा जाएंगे। गधा बोला हां मित्र मैं भूल गया था कि दूसरों के बल पर किसी से दुश्मनी नहीं लेनी चाहिए।

शिक्षा - हमें दूसरों के बल पर किसी से दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहिए।


10. जैसे को तैसा (short story in hindi with moral)

एक बुढ़िया थी जिसकी आंखें चली गई वह एक वैध राज के पास गई।और कहा अगर आप मेरी आंखें ठीक कर देंगे तो मैं आपको उचित इनाम दूंगी। अगर आप ऐसा नहीं कर पाए तो मैं आपको कुछ नहीं दूंगी। वैध राज तैयार हो गया और वह अगले दिन से बुढ़िया के घर जाकर उसका इलाज करने लगा।

पर उसे उसके घर रखें सामान को देखकर लालच आ गया। बुढ़िया को दिखता तो था नहीं इसी का फायदा उठाकर वैध राज एक एक समान चुरा लिया। फिर उसने बुढ़िया के घर जाना ही छोड़ दिया। परंतु भगवान के घर देर है अंधेर नहीं।

अचानक एक दिन बुढ़िया की आंखें ठीक हो गई। उसने पिछवाड़े में दबा हुआ धन निकाला। और उसी तरह बढ़िया जिंदगी जीने लगी वैध राज सोचने लगा कि उसका सारा जेवरात और सामान हम ने लूट लिया था। पर जब वैध राज उसे फिर से वैसे ही देखा तो वह राज दरबार में जाकर शिकायत कर दी।

राज दरबार में बुढ़िया ने माना कि उसने कहा था कि अगर उसकी आंखें ठीक हो गई तो वह वैधराज को उचित इनाम दूंगी। पर महाराज जब हम ने आंखें खोली तो हमारे घर में एक भी सामान नहीं दिखाई दिया यहां तक कि हमारे घर में एक भी बर्तन भी नहीं दिखाई दिया।

फिर यह कैसे कह सकते हैं कि मेरी आंखें ठीक हो गई हैं अगर ठीक हो गए हैं तो मेरा सामान कहां है। राजा ने गुड़िया की बात सुनकर उसे छोड़ दिया और वैध राज को हुक्म दिया कि उसका सारा सामान उसे दे दो।

शिक्षा - जैसे को तैसा मिलना चाहिए


11. समझदार लोमड़ी (short story in hindi for kids)

एक शेर और एक गधा और एक लोमड़ी में नई नई दोस्ती हो गई। तीनों मिलकर शिकार करने की योजना बनाई। और कहा कि शिकार पर तीनों का बराबर हिस्सा होगा। अचानक उन्होंने एक हिरण देखा तीनों ने मिलकर उसे बहुत थक आया।

और जब हिरन थक गया तो शेर ने उसे मार दिया। और गधे से कहा शिकार के तीन हिस्से कर दो। गधे ने उसे तीन बराबर हिस्सों में बांट दिया यह देखकर शेर को गुस्सा आ गया। और शेर ने गधे पर हमला करके मार दिया और फिर लोमड़ी से भी बोला लोमड़ी सब देख रही थी।

लोमड़ी अपने खुद के लिए एक चौथाई भाग रखा और सब शेर को दे दिया। तब शेर बहुत प्रसन्न हुआ और बोला तुम सही में बुद्धिमान हो यह सब तुमने कहां से सीखा है। लोमड़ी बोली यह सब हमने गधे की गलतियों से सीखा है।

शिक्षा - हमें अपने ही गलतियों से नहीं बल्कि दूसरों की गलतियों से भी सीखना चाहिए।


12. एकता में बल (short story in hindi for class 1)

किसी गांव में एक जमीदार रहता था। वह इतना अमीर था कि गांव के सभी इंसान उसे सुखी समझते थे। परंतु यह बात गलत थी उसके तीन बेटे थे। जो आपस में हमेशा लड़ते रहते थे। एक दिन जमींदार के दिमाग में एक विचार आया वह लकड़ियों का एक गट्ठर ले आया।

और अपने बेटों को बुलाया और बारी बारी से उन्हें गट्ठर को तोड़ने के लिए कहा। तीनों ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी पर वह गट्ठर को कोई नहीं तोड़ पाया। जमीदार ने फिर उस गठन को खोल दिया और कहां एक-एक करके छोड़ दो अब यह कार्य आसान था।

तो तीनों बेटों ने एक-एक करके तोड़ दिया। बड़े बेटे ने उत्सुकता पूर्वक पूछा बिना वजह आप यह हमसे क्यों करवा रहे हैं। बात सुनकर जमीदार हंसा और बोला तुम भी इन लकड़ियों की तरह हो जब तक एक साथ हो तब तक तुम्हारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है।

परंतु अगर तुम इसी तरह लड़ते रहोगे और अलग रहोगे तो इन्हीं लकड़ियों की तरह टूट जाओगे। तीनों बेटों को बात समझ में आ गई कि उनके पिता उन्हें क्या समझाना चाहते थे। तीनों ने वचन दिया कि वह अब कभी नहीं लड़ेंगे।

शिक्षा - एकता में शक्ति होती है


13. मुसीबत से छुटकारा (kids story in hindi)

जंगल के एक पेड़ पर कबूतरों का झुंड बैठा था। शिकारी ने जब कबूतरों के झुंड को देखा तो वहीं पर बादाम के दाने फेंककर जाल बिछा दिया। और जाकर पेड़ के पीछे छुप गया कबूतरों ने दाने देखकर उसे खाने के लिए एक-एक कर उतर आए।

और जब वह पढ़ने की कोशिश की तो उन्हें पता चला कि उनके पैर जाल में फंस गए हैं। कबूतर चिल्लाने लगे बचाओ बचाओ तभी एक कबूतर ने बोला कि जब मैं 1,2,3 बोलूंगा तो सब एक साथ उड़ना।

कबूतरों का नहीं पता था क्या होने वाला है पर सभी ने हामी भर दी।जब शिकारी पास आया तब कबूतर ने 1,2,3 बोला और सभी ने एक साथ उड़े तो उनके साथ जाल भी उड़ गई।

शिकारी यह देखकर अचंभे में पड़ गया। सारे कबूतर उड़ उड़ कर अपने मित्र चूहे के पास गए। तब चूहे ने जाल काट कर उन्हें आजाद कर दिया। यह सब उनकी एकता के कारण हुआ। इसीलिए कहते हैं एकता में शक्ति है।

शिक्षा - एकता में शक्ति होती है।


14. बेईमानी का नतीजा (stories for kids in hindi)

एक औरत ने अपने घर में दो नौकरानी रखी हुई थी। वह कौन से दिन भर काम कराती उस औरत के पास एक मुर्गा भी था। जो सुबह 4:00 बजे आवाज देकर उनको सुबह जल्दी उठा देता था। नौकरानी यों को सुबह उठना बिल्कुल भी पसंद नहीं था।

इसलिए नौकरानीयों को मुर्गे से भी नफरत हो गया था। एक दिन एक नौकरानी दूसरे नौकरानी से बोली जिस दिन नौकरानी कहीं गई होगी उस दिन मुर्गे को खत्म कर देंगे। इसके बाद हमें कोई जल्दी सुबह नहीं उठाएगा और हम जी भर के सो सकेंगे।

दूसरी नौकरानी को भी उसकी यह योजना पसंद आ गई। एक दिन मौका पाकर उन्होंने मुर्गे को मार दिया और आरोप किसी और पर लगा दिया। मालकिन को उनकी याद चाल समझ में आ गई थी।

इसलिए मालकिन ने उन्हें आधी रात को ही उठा दिया। वह दोनों बोली मालकिन अभी 4:00 नहीं बजे हैं। महिला बोली तुम काम करना शुरू करो और 4:00 बजे हमें जगा देना। नौकरानीया पछताने लगी कि हमने अपना ही नुकसान कर लिया। दोस्तों धोखेबाजी से अपना ही नुकसान होता है।

शिक्षा - हमें अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए। धोखेबाजी से अपना ही नुकसान होता है।


15. समझदार भेड़िया ( a short moral story in hindi )

एक जंगल में एक भेड़िया था जो बहुत समझदार और बुद्धिमान था।एक दिनों से एक मरा हुआ हाथी दिखाई दिया। भेड़िया ने अपने पंजे से उसकी चमड़ी उतरने की कोशिश की पर चमड़ी बहुत सख्त थी।हाथी की चमड़ी उतारना भेड़िए की बस की बात नहीं थी।

अचानक वहां एक बब्बर शेर आ गया। भेड़िया शेर को देखकर बोला मालिक मैं तो आपके लिए ही इस की रखवाली कर रहा था। यह मेरी तरफ से आपके लिए तोहफा है। शेर बोला धन्यवाद और तुम मेरा स्वभाव जानते हो मैं दूसरे का शिकार किया हुआ नहीं खाता हूं।

मैं अपनी खुशी से तुम्हें यह देता हूं। यह कहकर बब्बर शेर वहां से चला गया। तभी वहां एक साधारण शेर आया भेड़िया उसे देखकर बोला चाचा जी चाचा जी आप कहां मौत के मुंह में चले आ रहे हैं। शेर बोला क्या मतलब भेड़िया बोला यह शिकार बब्बर शेर ने किया है और हमें रखवाली के लिए बोला है।

और साथ में कहा है कि अगर कोई इधर शेर दिखाई दे तो मुझे सूचित करना मैं सारे शेरों का खात्मा कर दूंगा। इतना सुनकर साधारण शेर वहां से भाग निकला तभी वहां एक चीता आया। भेड़िया चिता को देखकर मन ही मन सोचा इसके दांत नुकीले हैं।

क्यों ना हाथी की चमड़ी इसी से कटवाले भेड़िए ने चीते से कहा देखो भांजे इस हाथी का शिकार बब्बर शेर ने किया है। और मुझे रखवाली के लिए रखा है। अगर तुम हाथी का स्वादिष्ट मांस खाना चाहते हो तो जल्दी खाना कहीं राजा ना आ जाए।

चिता उसकी बातों में आ गया और मांस खाने के लिए जैसे ही चमड़ी को उतारा वैसे ही भेड़िया बोला भाग लो भांजे बब्बर शेर आ रहा है।चीता भाग गया इस तरह भेड़िए ने लंबे समय के लिए अपने भोजन का इंतजाम कर लिया।

Moral of the stories

शिक्षा - अकलमंदी से मुश्किल से मुश्किल काम भी आसान किया जा सकता है।


16. जलपरी और लकड़हारा ( story in hindi written )

एक गरीब लकड़हारा था वह अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए जंगल से लकड़ियां काटता और शहर में जा कर बेचता था।एक दिन जब वह नदी किनारे एक पेड़ पर बैठकर लकड़ी काट रहा था। तभी उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। उसे तैरना नहीं आता था।

इसलिए वह नदी किनारे बैठ कर रोने लगा। तभी नदी में से एक जलपरी निकली। और बोली तुम क्यों रो रहे हो मैं जलपरी हूं मुझे बताओ शायद मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं। लकड़हारा बोला जब मैं उस पेड़ पर लकड़ी कर रहा था तो मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई।

जलपरी बोली चिंता मत करो मैं तुम्हारे कुल्हाड़ी ढूंढ दूंगी। जलपरी पानी में गई और एक सोने की कुल्हाड़ी लेकर आई। और बोला क्या यह है तुम्हारी कुल्हाड़ी लकड़हारा बोला नहीं यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।

जलपरी फिर गई और इस बार चांदी की कुल्हाड़ी लेकर आई और फिर पूछा क्या यह है तुम्हारी कुल्हाड़ी लकड़हारा बोला नहीं यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है। इस बार जलपरी फिर गई और लोहे की कुल्हाड़ी लेकर आई उसे देखकर लकड़हारा बोला हां यही है मेरी कुल्हाड़ी जलपरी बहुत खुश हुई। और लकड़हारे को सोने और चांदी की कुल्हाड़ी भी दे दी।

Moral of the stories

शिक्षा - ईमानदारी का फल सदा अच्छा ही होता है।

17. घोड़ा अड़ गया ( hindi short stories )

संत महात्माओं को हमारी विशेष गरज रहती है। जैसे मां को अपने बच्चे की याद आती है बच्चे को भूख लगते ही मां स्वयं चलकर बच्चे के पास चली आती है। ऐसे ही संत महात्मा सच्चे जिज्ञासु के पास खींचे चले आते हैं।

एक गृहस्थ बहुत ऊंचे दर्जे के जीवन मुक्त महापुरुष थे। वे अपने घोड़े पर चढ़कर किसी गांव जा रहे थे। चलते चलते घोड़ा एक अन्य रास्ते पर चल पड़ा। उन्होंने उसको जितना ही मोड़ना चाहा लेकिन वह तो उसी रास्ते पर चलने के लिए अड़ गया।

इस पर उन्होंने सोचा कि अच्छी बात है इसके मन में जिधर जाने की है उधर से चलना चाहिए। अपने थोड़ा चक्कर पड़ेगा कोई बात नहीं वह घोड़ा जाते जाते एक घर के सामने रुक गया । समय अधिक हो गया था अतः वह स्थान तो घोड़े से नीचे उतर पड़े और उस घर के अंदर गए।

वहां एक सज्जन मिले । उन्होंने उन महापुरुष का बड़ा आदर सत्कार किया क्योंकि वे उन्हें नाम से जानते थे कि अमुक नाम के महापुरुष बड़े अच्छे संत हैं। वे सज्जन अच्छे साधक थे वह कई बार सोचते थे कि संत महात्मा के पास जाएं और उनसे साधना संबंधित रास्ता पूछें।

आज तो भगवान ने कृपा कर दी तो महात्मा घर बैठे ही उनके पास आ गए। उन्होंने उन गृहस्थ संत को भोजन आदि कराया सतसंगत संबंधित बातें हुई जो बातें उन सज्जन ने पूछे उनका अच्छी प्रकार समाधान उन संत ने किया।

वह शांत जाते-जाते बोले कि भाई जब भी कोई शंका हो तो यह मेरा पता है आ जाना या मुझे समाचार कर देना मैं आ जाऊंगा उस पर उन सज्जन ने पूछा महाराज अभी आपको किसने समाचार भेजा था कि आप पधारे।

तो यह संत बोले मेरा घोड़ा अड़ गया था इसलिए मुझे आना पड़ा। तो उन सज्जन ने कहा अब की बार फिर आप का घोड़ा और जाए तब फिर आ जाना तात्पर्य यह है कि जब साधक की सच्ची जिज्ञासा होती है तो संतों का घोड़ा अड़ जाता है।

संतो की बात क्या स्वयं भगवान के कानों में भी सच्ची पुकार तुरंत पहुंच जाती है और वह किसी संत के साथ हमारी भेंट करा देते हैं।

पराया हक ( short hindi stories )

आजकल टैक्स बहुत बढ़ जाने से लोग व्यापार आदि में चोरी-छिपे करते हैं जैसे-जैसे वकील सिखाता है। वैसा वैसा करके वे धन बचाने की चेष्टा करते हैं। वे विचार ही नहीं करते कि इस प्रकार धन बचाने से अंतःकरण कितना मैला हो जाएगा। एक संत कहा करते थे कि शुद्ध कमाई के धन से बहुत पवित्रता आती है। उसके पास एक राजा आया करते थे। एक बार राजा ने उनसे पूछा कि महाराज आपके यहां बहुत से लोग आया करते हैं।

और आप भी कई लोगों के घरों में भिक्षा के लिए जाया करते हैं। ऐसा कोई घर आपकी दृष्टि में है जिसका शुद्ध कमाई का हो? अगर ऐसे घर आपको दिखता है तो बताएं। संत ने कहा कि अमुक स्थान पर एक बूढ़ी माई रहती है उसके घर का शुद्ध है। वह उन को काट कर उससे अपनी जीविका चलाती है।

उसके पास धन नहीं है साधारण घास फूस की कुटिया है परंतु वह पराया हक नहीं लेती इस कारण उसका अन्न शुद्ध है। ऐसा सुनकर राजा के मन में आया कि उसके घर की रोटी मिल जाए तो बड़ा अच्छा है राजा स्वयं एक भिखारी बन कर उसके घर पहुंचा और बोला माताजी कुछ भिक्षा मिल जाए। वह बूढ़ी माई भीतर से रोटी लाई और बोली बेटा यह रोटी ले लो। तब राजा ने पूछा माता जी एक बात बताओ कि यह रोटी शुद्ध है ना?

इसमें पराया हक तो नहीं है तो वह बोली देख बेटा बात यह है कि यह पूरी शुद्ध नहीं है इसमें थोड़ा पराया हक आ गया है! 1 दिन रात में बारात जा रही थी। बारात में जो गैस बत्तियां थी उसके प्रकाश में मैंने उन ठीक की थी इतना उसमें पराया हक आ गया है। राजा ने बड़ा आश्चर्य किया कि इतनी सी कमी का भी इतना ख्याल है! दूसरे के उस प्रकाश में हमारा क्या अधिकार है कि उसमें हम अपनी उन ठीक करें।

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हमारी short moral story in hindi पढ़ कर मजा आया होगा।

ये कहानियाँ बच्चों के लिए हैं और इसमें ज्ञान के शब्द लिखे हैं। ये लघु कथाएँ बच्चों के साथ-साथ सभी के लिए उपयोगी होंगी। यह short stories बचपन की याद दिलाती हैं।


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